रविवार, 7 अक्टूबर 2012

पितृ तर्पण विधि pitru tarpan vidhi

पितृ तर्पण विधि pitru tarpan vidhi





तर्पण मन्त्र TARPAN MANTRAS
आवाहन Awahan: दोनों हाथों की अनामिका (छोटी तथा बड़ी उँगलियों के बीच की उंगली) में कुश (एक प्रकार की घास) की पवित्री (उंगली में लपेटकर दोनों सिरे ऐंठकर अंगूठी की तरह छल्ला) पहनकर, बाएं कंधे पर सफेद वस्त्र डालकर  दोनों हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों को निम्न मन्त्र से आमंत्रित करें 
 First wear pavitree (ring of kushaa- e typa of grass) in ring fingers of both the hands and place a whitk cloth piece on right shoulder. Now invite (call) your ancestor’s spirit by praying (fold your hand) through this mantra:

'ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम'  
ॐ हे पितरों! पधारिये तथा जलांजलि ग्रहण कीजिए। 
“Om Aagachchantu Me Pitar Emam Grihanantu Jalaanjalim.”

तर्पण: जल अर्पित करें Tarpan (offer Water)

निम्न में से प्रत्येक को 3 बार किसी पवित्र नदी, तालाब, झील या अन्य स्रोत (गंगा / नर्मदा जल पवित्रतम माने गए हैं) के शुद्ध जल में थोडा सा दूध, तिल तथा जावा मिला कर जलांजलि अर्पित करें। 
 Now offer water taken from any natural source river, tank, lake etc.( Ganga / narmada Jal considered most pious) mixed with little milk, java & Til r : 3 times for each one

पिता हेतु  For Father: 
(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मतपिता पिता का नाम शर्मा वसुरूपस्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
 ........... गोत्र के मेरे पिता श्री वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों। तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
“gotra name  Gotrah Asmat (mine) Pita () father name of father  Sharma Vasuroopastripyatamidam Tilodakam (GangaJalam Vaa) Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah.”

Tilodakam: Use water mixed with milk java & Til ( water taken fromGanga / narmada rivers cosidered best) Tasmey Swadha Namah recite 3 times while leaving (offering) water from hand
pitamah (dada / babba) hetu To Grand Father:
उक्त में अस्मत्पिता के स्थान पर अस्मत्पितामह पढ़ें  Replace AsmatPita with Asmatpitamah
वसुरूपस्त्तृप्यतमिदं के स्थान पर रूद्ररूपस्त्तृप्यतमिदं पढ़ें Replace Vasuroopastripyatamidam with Rudraroopastripyatamidam

पिता के नाम के स्थान पर पितामां का नाम लें Replace Father’s Sharma with Grand Father’s Name
माता हेतु  तर्पण Tarpan to Mother

(गोत्र नाम) गोत्रे अस्मन्माता माता का नाम देवी वसुरूपास्त्तृप्यतमिदं तिलोदकम (गंगा/नर्मदा जलं वा) तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।
 ........... गोत्र की मेरी माता श्रीमती ....... देवी वसुरूप में तिल तथा पवित्र जल ग्रहण कर तृप्त हों। तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः तस्मै स्वधा नमः।“AmukGotraa Asmnamata AmukiDevi Vasuroopaa Tripyatamidam Tilodakam Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah, Tasmey Swadha Namah.”

निस्संदेह मन्त्र श्रद्धा अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम हैं किन्तु भावना, सम्मान तथा अनुभूति अन्यतम हैं। It is true that mantra is a great medium for pray and offerings.
But love, attachment, feelings, sentiments, emotions, regards, Bhawana is a prime not mantras.

पितृ विसर्जन दिवस: आश्विन पितृ पक्ष अमावस्या सोमवार 15 अक्टूबर 2012 
Pitra Visarjan day:Ashwin Pitra Paksha Amvasya: Mon, 15 Oct 2012
जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार तथा दक्षिण दिशा में 14 बार अर्पित करें 
offer jalanjali (take tilodikam in both hands joined and leave graduaalee on earth or in some vassel) 16 times in east, 7 times in north & 14 times in south. 
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ॐ राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद

राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद् : कार्यकारिणी समिति पुनर्गठित


राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद
(कायस्थ सभाओं / संस्थाओं / मंदिरों / धर्मशालाओं / शिक्षा संस्थाओं / पत्र पत्रिकाओं का परिसंघ )
: कार्यालय :
राष्ट्रीय अध्यक्ष: जे. ऍफ़. १/७१, ब्लोक ६, मार्ग १० राजेन्द्र नगर पटना ८०००१६ बिहार
वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: २०४ , विजय अपार्टमेन्ट, नेपियर टाउन, जबलपुर, ४८२००१ मध्य प्रदेश
महामंत्री: २०९-२१० आयकर कॉलोनी, विनायकपुर, कानपुर २०८०२५ उत्तर प्रदेश
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क्रमांक: ०५२ / राकाम / वराउ / २०१२                          
                            जबलपुर, दिनाँक: ७.१०.२०१२
प्रतिष्ठार्थ:
आदरणीय संपादक जी,
सादर प्रकाशनार्थ विज्ञप्ति संलग्न है.
राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद् : कार्यकारिणी समिति पुनर्गठित
राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद् कायस्थ समाज की कायस्थ सभाओं / संस्थाओं / मंदिरों / धर्मशालाओं / शिक्षा संस्थाओं / पत्र पत्रिकाओं का राष्ट्र व्यापी परिसंघ है जिसके सदस्य भारत से बाहर विदेशों में भी हैं. यह एक जातीय संस्था मात्र नहीं है अपितु उन सभी का परिसंघ है जो मानते हैं कि परमपिता परमात्मा एक है जिसके विविध रूपों की उपासना विविध पंथों के माध्यम से करनेवाले सभी धर्मावलंबी समान हैं. अतः, मनुष्य मात्र में देश, लिंग, धर्म, पंथ, जाति, भाषा, विचारधारा, दल, प्रान्त, क्षेत्र ,परिवार, या अन्य आधार पर के नाम पर किसी भी प्रकार का भेदभाव किया जाना गलत है. सभी को योग्यता वृद्धि हेतु समान अवसर, योग्यतानुसार कार्य, पदोन्नति- अवसर, आय, प्रतिष्ठा, संपत्ति आदि अर्जित करने के समान अवसर मिलने चाहिए.

महापरिषद की पुनर्गठित राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति निम्नानुसार है:

राष्ट्रीय अध्यक्ष: चित्रांश त्रिलोकी प्रसाद वर्मा, रामसखीनिवास,  मुजफ्फरपुर८४२००२. चलभाष: ०९८३८५२३०२९, ईमेल: trilokeeverma@gmail.com. 
वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: चित्रांश आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', समन्वयम, २०४ विजय अपार्टमेन्ट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१. दूरभाष : ०७६१ २४१११३१ / चलभाष: ९४२५१ ८३२४४. ई मेल: salil.sanjiv@gmail.com, वैब:hindihindi.in.divyanarmada
ब्लॉग: rashtreeykayasthamahaparishad.blogspot.com  
वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: चित्रांश राकेश निगम, झाँसी ०९४१५१४३४७६
राष्ट्रीय महासचिव: चित्रांश डॉ. यू. सी. श्रीवास्तव, २०९ आयकर कोलोनी, विनायकपुर, कानपुर २०८०२५, ०९९३५०३८८४३ ई मेल: drucshrivastava@gmail.com
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (बिहार): चित्रांश कुमार अनुपम पटना, ०९४३१४ २६९९१
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (उ.प्र.): चित्रांश कमलकांत वर्मा, लखनऊ ०९४५२६७४०१२
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (छत्तीसगढ़): चित्रांश राजेश सक्सेना ०९८२६१८३२४७
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष(उ.प्र.): चित्रांश चारूचन्द्र खरे, बांदा ०९४१५१४४०४७
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (राज.): चित्रांश भागवतस्वरूप कुलश्रेष्ठ 
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (म.प्र.): चित्रांश दिनेश प्रसाद सिन्हा, उज्जैन ०९०२५३३२६७६
संयोजक (राज.): चित्रांश सचिन खरे, डी ३ / १९९ चित्रकूट योजना, वैशाली जयपुर ३०२०२१, चलभाष: ९४६०३- ०३९६९, ई मेल: mail@sachinbjp.comजयपुर.
महासचिव (संगठन): चित्रांश अरुण श्रीवास्तव 'विनीत', शांति कुञ्ज २१/५८५ सिंधिया नगर दुर्ग ४९१००२ चलभाष: ०९४२५२०१२५१ ईमेल: arunchitransh@gmail.com
कोषाध्यक्ष: चित्रांश अरविन्द कुमार सिन्हा, पटना ०९४३१०७७५५५ 
अंकेक्षक: चित्रांश अनुग्रह श्रीवास्तव, ०९३३६८५५४१७
प्रचार सचिव: चित्रांश प्रशांत कुमार सिन्हा, दिल्ली ०९८११६८४५९३
संयुक्त सचिव: चित्रांश दिनकर वर्मा, नई दिल्ली
संयुक्त सचिव : चित्रांश डॉ. प्रमोद कुमार सिन्हा, पटना
प्रवक्ता: चित्रांश अरुण माथुर, जयपुर ०९९२९६२८४३९
सलाहकार: चित्रांश अशोक सिन्हा, पटना ०९९३९७२३८८५
सलाहकार: चित्रांश अशोक श्रीवास्तव, नोएडा ०९३१२२०४३१३
कार्यकारिणी सदस्य: सर्व चित्रांश आनंदमोहन श्रीवास्तव जौनपुर, विनयमोहन श्रीवास्तव उज्जैन, सतीशचन्द्र श्रीवास्तव झाँसी, शिवप्रसाद श्रीवास्तव बनारस, के. के. सिन्हा अयोध्या, सच्चिदानन्द श्रीवास्तव अयोध्या, अयोध्या प्रसाद निगम हमीरपुर, ब्रजेश सक्सेना हमीरपुर,

समन्वयक: चित्रांश व्ही. पी. श्रीवास्तव, कानपुर ०९८३८५२३०२९
मार्गदर्शक मंडल: सर्व चित्रांश विनोद बिहारी वर्मा लखनऊ, केदारनाथ सिन्हा वाराणसी, प्रदीप वर्मा वाराणसी, अखौरी विजयप्रकाश सिन्हा औरंगाबाद, बिन्ध्येश्वरी प्रसाद सिन्हा बलरामपुर, के. पी सहाय कोटा, आलोक श्रीवास्तव नागपुर, ब्रजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव गया, कृष्णमंगल सिंह कुलश्रेष्ठ उज्जैन, जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव अयोध्या, हरेन्द्र कुमार पटना.

महापरिषद् मानव समानता के प्रति विश्वास करनेवाले सभी जनों का आव्हान करती है कि एक जुट होकर राष्ट्र व समाज निर्माण की नव चेतना जाग्रत कर भ्रष्टाचार तथा आरक्षण के विरुद्ध संघर्ष कर सामाजिक / राजनैतिक / आर्थिक शुचिता अपना कर देश को सशक्त बनाने में योगदान करें. सर्वाधिक शांतिप्रिय, बुद्धिजीवी तथा कर्मठ कायस्थ अन्य समाजों के सदस्यों से  सामाजिक नवचेतना जागृत करने में महापरिषद तथा श्री सचिन खरे से डी ३ / १९९ चित्रकूट योजना, वैशाली जयपुर ३०२०२१, चलभाष: ९४६०३- ०३९६९, ई मेल: mail@sachinbjp.com  पर संपर्क कर सहयोग करने का अनुरोध है.


                                                                                                              चित्रांश आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
चलभाष : 9425183244, दूरभाष: 0761-2411131
E-mail: salil.sanjiv@gmail.com
hindihindi.in.divyanarmada
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मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

II श्री महालक्ष्यमष्टक स्तोत्र II ( मूल पाठ-तद्रिन हिंदी काव्यानुवाद-संजीव 'सलिल' )

 II  ॐ II

II श्री महालक्ष्यमष्टक स्तोत्र II 

( मूल पाठ-तद्रिन हिंदी काव्यानुवाद-संजीव 'सलिल' )

नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते I
शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोsस्तुते II१II

सुरपूजित श्रीपीठ विराजित, नमन महामाया शत-शत.
शंख चक्र कर-गदा सुशोभित, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

नमस्ते गरुड़ारूढ़े कोलासुर भयंकरी I
सर्व पापहरे देवी महालक्ष्मी नमोsस्तुते II२II

कोलाsसुरमर्दिनी भवानी, गरुड़ासीना नम्र नमन.
सरे पाप-ताप की हर्ता,  नमन महालक्ष्मी शत-शत..

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्ट भयंकरी I
सर्व दु:ख हरे देवी महालक्ष्मी नमोsस्तुते II३II

सर्वज्ञा वरदायिनी मैया, अरि-दुष्टों को भयकारी.
सब दुःखहरनेवाली, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

सिद्धि-बुद्धिप्रदे देवी भुक्ति-मुक्ति प्रदायनी I
मन्त्रमूर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोsस्तुते II४II

भुक्ति-मुक्तिदात्री माँ कमला, सिद्धि-बुद्धिदात्री मैया.
सदा मन्त्र में मूर्तित हो माँ, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

आद्यांतर हिते देवी आदिशक्ति महेश्वरी I
योगजे योगसंभूते महालक्ष्मी नमोsस्तुते II५II

हे महेश्वरी! आदिशक्ति हे!, अंतर्मन में बसो सदा.
योग्जनित संभूत योग से, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

स्थूल-सूक्ष्म महारौद्रे महाशक्ति महोsदरे I
महापापहरे देवी महालक्ष्मी नमोsस्तुते II६II

महाशक्ति हे! महोदरा हे!, महारुद्रा  सूक्ष्म-स्थूल.
महापापहारी श्री देवी, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

पद्मासनस्थिते देवी परब्रम्ह स्वरूपिणी I
परमेशीजगन्मातर्महालक्ष्मी नमोsस्तुते II७II

कमलासन पर सदा सुशोभित, परमब्रम्ह का रूप शुभे.
जगज्जननि परमेशी माता, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

श्वेताम्बरधरे देवी नानालंकारभूषिते I
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोsस्तुते II८II

दिव्य विविध आभूषणभूषित, श्वेतवसनधारे मैया.
जग में स्थित हे जगमाता!, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

महा लक्ष्यमष्टकस्तोत्रं य: पठेद्भक्तिमान्नर: I
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यंप्राप्नोति सर्वदा II९II

जो नर पढ़ते भक्ति-भाव से, महालक्ष्मी का स्तोत्र.
पाते सुख धन राज्य सिद्धियाँ, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

एककालं पठेन्नित्यं महापाप विनाशनं I
द्विकालं य: पठेन्नित्यं धन-धान्यसमन्वित: II१०II

एक समय जो पाठ करें नित, उनके मिटते पाप सकल.
पढ़ें दो समय मिले धान्य-धन, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

त्रिकालं य: पठेन्नित्यं महाशत्रु विनाशनं I
महालक्ष्मीर्भवैन्नित्यं प्रसन्नावरदाशुभा II११II

तीन समय नित अष्टक पढ़िये, महाशत्रुओं का हो नाश.
हो प्रसन्न वर देती मैया, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

 II तद्रिन्कृत: श्री महालक्ष्यमष्टकस्तोत्रं संपूर्णं  II

तद्रिंरचित, सलिल-अनुवादित, महालक्ष्मी अष्टक पूर्ण.
नित पढ़ श्री समृद्धि यश सुख लें, नमन महालक्ष्मी शत-शत..

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Acharya Sanjiv Salil

http://divyanarmada.blogspot.com

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

यम द्वितीय चित्रगुप्त पूजन पर विशेष भेंट: भजन: प्रभु हैं तेरे पास में... -- संजीव 'सलिल'

यम द्वितीय चित्रगुप्त पूजन पर विशेष भेंट:
भजन:
प्रभु हैं तेरे पास में...
-- संजीव 'सलिल'
*
कहाँ खोजता मूरख प्राणी?, प्रभु हैं तेरे पास में...
*
तन तो धोता रोज न करता, मन को क्यों तू साफ रे!
जो तेरा अपराधी है, उसको करदे हँस माफ़ रे..
प्रभु को देख दोस्त-दुश्मन में, तम में और प्रकाश में.
कहाँ खोजता मूरख प्राणी?, प्रभु हैं तेरे पास में...
*
चित्र-गुप्त प्रभु सदा चित्त में, गुप्त झलक नित देख ले.
आँख मूंदकर कर्मों की गति, मन-दर्पण में लेख ले..
आया तो जाने से पहले, प्रभु को सुमिर प्रवास में.
कहाँ खोजता मूरख प्राणी?, प्रभु हैं तेरे पास में...
*
मंदिर-मस्जिद, काशी-काबा मिथ्या माया-जाल है.
वह घट-घट कण-कणवासी है, बीज फूल-फल डाल है..
हर्ष-दर्द उसका प्रसाद, कडुवाहट-मधुर मिठास में.
कहाँ खोजता मूरख प्राणी?, प्रभु हैं तेरे पास में...
*
भजन:
प्रभु हैं तेरे पास में...                                                                           
संजीव 'सलिल'
*
जग असार सार हरि सुमिरन ,
डूब भजन में ओ नादां मन...
*
निराकार काया में स्थित, हो कायस्थ कहाते हैं.
रख नाना आकार दिखाते, झलक तुरत छिप जाते हैं..
प्रभु दर्शन बिन मन हो उन्मन,
प्रभु दर्शन कर परम शांत मन.
जग असार सार हरि सुमिरन ,
डूब भजन में ओ नादां मन...
*
कोई न अपना सभी पराये, कोई न गैर सभी अपने हैं.
धूप-छाँव, जागरण-निद्रा, दिवस-निशा प्रभु के नपने हैं..
पंचतत्व प्रभु माटी-कंचन,
कर मद-मोह-गर्व का भंजन.
जग असार सार हरि सुमिरन ,
डूब भजन में ओ नादां मन...
*
नभ पर्वत भू सलिल लहर प्रभु, पवन अग्नि रवि शशि तारे हैं.
कोई न प्रभु का, हर जन प्रभु का, जो आये द्वारे तारे हैं.. 
नेह नर्मदा में कर मज्जन,
प्रभु-अर्पण करदे निज जीवन.
जग असार सार हरि सुमिरन ,
डूब भजन में ओ नादां मन...
*

Acharya Sanjiv Salil

http://divyanarmada.blogspot.com

रविवार, 16 जनवरी 2011

कायस्थ कौन हैं? -- संजीव वर्मा 'सलिल'

शंका समाधान :
 
कायस्थ कौन हैं?
 
संजीव वर्मा 'सलिल'
*
जिसकी काया में ''वह'' (परात्पr परम्ब्रम्ह जो निराकार है, जिसका चित्र गुप्त है, जो हर चित्त में गुप्त है) स्थित है, जिसके निकल जाने पर कहें कि 'मिट्टी' जा रही है- वह कायस्थ है. इस सृष्टि में उपस्थित सभी चर-अचर, दृष्ट-अदृष्ट कायस्थ है. व्यावहारिक या सांसारिक अर्थ में जो इस सत्य को जानते और मानते हैं वे 'कायस्थ' है.

इसी लिए कहा गया "कायथ घर भोजन करे बचे न एकहु जात'' जिस प्रकार गंगा में स्नान से सही नदियों में स्नान का सुख मिल जाता है, वैसे ही कायस्थ के घर में भोजन करने से हर जाति के घर में भोजन करने अर्थात सबसे रोटी-बेटी सम्बन्ध की पात्रता हो जाती है.

बुधवार, 29 दिसंबर 2010

शुभाकांक्षा :

शुभाकांक्षा :                                                                                            

विनय यही है आपसे सुनिए हे सलिलेश!

रहें आपके द्वार पर खुशियाँ अगिन हमेश..

नये वर्ष में कट सकें भव-बाधा के पाश.

अँगना में फूलें 'सलिल' यश के पुष्प पलाश..

बिदाई गीत: अलविदा दो हजार दस... संजीव 'सलिल'

बिदाई गीत:                                                                                 

अलविदा दो हजार दस...

संजीव 'सलिल'
*
अलविदा दो हजार दस
स्थितियों पर
कभी चला बस
कभी हुए बेबस.
अलविदा दो हजार दस...

तंत्र ने लोक को कुचल
लोभ को आराधा.
गण पर गन का
आतंक रहा अबाधा.
सियासत ने सिर्फ
स्वार्थ को साधा.
होकर भी आउट न हुआ
भ्रष्टाचार पगबाधा.
बहुत कस लिया
अब और न कस.
अलविदा दो हजार दस...

लगता ही नहीं, यही है
वीर शहीदों और
सत्याग्रहियों की नसल.
आम्र के बीज से
बबूल की फसल.
मंहगाई-चीटी ने दिया 
आवश्यकता-हाथी को मसल.
आतंकी-तिनका रहा है
सुरक्षा-पर्वत को कुचल.
कितना धंसेगा?
अब और न धंस.
अलविदा दो हजार दस...
 
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